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असंभव कुछ नहीं

असंभव कुछ नहीं

कहानी, जीवन वृत्त, मुख्य, व्यक्ति चित्र
हमारा जीवन बहुत कठिन है या में कुछ नहीं कर सकता ये शब्द आपने अकसर अपने आस पास के लोगो से सुना होगा और जब हमारे जीवन में एकसाथ बहुत सी मुश्किल हो तब, हम मुश्किलों का सामना करने की वजह उससे कही दूर भागने की सोचते हैं पर वास्तव में क्या ऐसा हो पाता है नहीं बल्कि हम उसकी चिंता में अपना आत्मविश्वास भी खो बैठते है और बिना कुछ किये ही हार मान लेते हैं जबकि वास्तव में हमने उसके लिए कोई प्रयास ही किया ही नहीं होता | आपको एक कहानी सुनाता हु ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जो उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर की निवासी है और अपने दिल में अपने सपनो को जिन्दा रखकर उन्हें पूरा करने की कोशिश कर रही थी दोस्तों यह बात उन दिनों की है जब यह लखनऊ से दिल्ली ट्रैन से आ रही थी तब ट्रैन में मौका पाकर बरेली के पास बदमाशों ने इनसे लूटपाट करने की कोशिश की तब इन्होने उसका विरोध किया तो उन बदमाशों ने इन्हे ट्रैन से बाहर
माँ वक्त वो ना रहा….

माँ वक्त वो ना रहा….

कविता, चिट्ठी पतरी, मुख्य, सोशल मीडिया, हिन्दी साहित्य
माँ वो वक्त वो ना रहा... ज़ब बचपन माँ तुम्हारे आंचल की छाँव में गुजरता था... ना कोई चिंता होती तब ना कोई फ़िक्र का पहरा रहता  था __ जब रोती कभी आँखें तो माँ चुप कराया करती थी.... अपने प्यार के उस आँचल में मुझे कही छुपाया करती थी.... जब रोज पापा के डर से सरारत कम हो जाया करती थी... किसी का डांटना चिल्लाना भी तब उतना नहीं अखरता था... आज की इस दुनिया मे सब उल्टा सा लगता है__ ना वो बचपन का प्यार अब कही भी दिखता है__ तब मतलब, स्वार्थ, पैसो की दुनिया भी नहीं होती थी__ जलन,  ईर्ष्या, द्वेष की ज्वाला भी ना होती थी __ आज तो हर पग-पग पर पैरों मैं जंजीरें हैँ__ ठुकराते हैँ सब यहां सब खूब ही मुझे रुलाते हैं__ झूठें किस्सों के किरदार भी मुझको कभी बनाते हैं___ माँ तब मे टूट जाता हु सबसे रूठ जाता हुँ __ तुझे याद करके माँ मैं अक्सर रो भी जाता हुँ __
जिंदगी के पड़ाव

जिंदगी के पड़ाव

कविता, मुख्य, हिन्दी साहित्य
  जिंदगी के पड़ाव पर हमनें चलते देखा , हमनें रुकते देखा | हमनें थकते देखा, थक कर रुक जाते और मुरझाते देखा, धरा के इस पञ्च तत्व में, विलय शून्य बन जाते देखा जिंदगी के पड़ाव पर हमनें चलते देखा , हमनें रुकते देखा || थक गए चलते-चलते, मंजिल का विश्राम नहीं, ऐसे मानों राह बड़ा, पथ का कोई ज्ञान नहीं | खोज रहे उस पावक पथ को, निज पाओं से चलते-चलते, जब थक कर चूर हुए अरमान, तब आसमान की ओर भी देखा, उजियारे भी चले गए, अब अंधकार के बादल बैठे, उन्नत मस्तक अरमानों का, अपमानों से सम्मानों तक, कभी मिलते देखा, कभी लड़ते देखा, कभी चलते देखा, कभी रुकते दखा, जिंदगी के पड़ाव पर हमनें चलते देखा , हमनें रुकते देखा || कभी पावों के निचे अंगारें, कभी प्रलय की घोर घटायें, कभी अपनों के कल कहार में, घोर घृणा और दीर्घ हार में , नफरत के इस अंगार में हमनें सुलगते देखा, हमनें धधकते देखा, नफरत के इस
अटल बिहारी वाजपेयी अब नहीं रहें हमारें बिच – 93 साल की उम्र में एम्स में ली अंतिम सांसें, PAK, US, चीन से आए शोक संदेश

अटल बिहारी वाजपेयी अब नहीं रहें हमारें बिच – 93 साल की उम्र में एम्स में ली अंतिम सांसें, PAK, US, चीन से आए शोक संदेश

देश
भारत रत्न, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांसें ली | 93 वर्ष के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का लम्बे समय से इलाज चल रहा था | वाजपेयी को 2014 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था | श्री अटल बिहारी वाजपेयी 3 बार प्रधानमंत्री रहे, वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही चल पाई थी | 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने थे और 1999 में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 सालों का कार्यकाल पूरा किया | 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में वे लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए | उनके खुद के शब्दों में ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं’. 2009 से ही वे व्हीलचेयर पर थे, वे डिमेंशिया नाम की गंभ
‘संजू’ – क्यों थे संजू’ के किरदार के लिए Ranbir Kapoor पहली पसंद ?

‘संजू’ – क्यों थे संजू’ के किरदार के लिए Ranbir Kapoor पहली पसंद ?

बॉलीवुड, मुख्य
'संजू' एक बायोपिक जो संजय दत्त के जीवनी को ले कर फिल्माया गया | इस फिल्म में संजू का किरदार निभाने के लिए फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी के पहले पसंद रणबीर कपूर बने, कई लोग इस बात को ले कर बहुत हैरान रहे लेकिन ऐसा होने के पीछे बहुत से कारण थे जिसके चलते रणबीर कूपर पसंद बने | रणबीर कूपर और संजय दत्त पर्सनैलिटी और सकल में एक दुसरे से मिलता जुलता बिलकुल नहीं था लेकिन | आइए जानते हैं ऐसा क्या रहा | राजकुमार हिरानी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था की रणबीर कपूर पर्सनैलिटी ऐसी है वह उम्र के हिसाब से छोटे-बड़े किरदारों में फिट हो सकते है, चाहे वह किरदार 21 साल का हो या 50 साल का | दूसरी सबसे बड़ी बजह है की रणबीर कूपर एक शानदार कलाकार हैं. संभवत: फिल्म की शुरुआत संजय दत्त की रॉकी स्टाइल में एंट्री वाली  दृश्यों से होगी इस लिए निर्देशक राजकुमार हिरानी को ऐसे एक्टर की जरूरत थी जो सभी किरद
ऐसे हुई थी संजय दत्त की पहली पत्नी की मौत, कभी देखकर हो गए थे दीवाने | खुद पर बनी ” फिल्म संजू ” देखकर भावुक हो गए संजय दत्त

ऐसे हुई थी संजय दत्त की पहली पत्नी की मौत, कभी देखकर हो गए थे दीवाने | खुद पर बनी ” फिल्म संजू ” देखकर भावुक हो गए संजय दत्त

बॉलीवुड, मुख्य
संजय दत्त की बॉयोपिक संजू 29th June 2018 फिल्म रिलीज़ हुवा था | इस फिल्म में संजय दत्त के जीवन के पहलुओं और हर रंगों को दिखाया गया है | फिल्म में उनकी तीसरी पत्नी मान्यता दत्त का किरदार को दीया मिर्जा की है | फिल्म में सबसे बड़ी बात है की उनकी पहली पत्नी रिचा शर्मा का जिक्र नहीं है| आप को बता दे की संजय की पहली पत्नी रिचा शर्मा से उनकी मुलाकात फिल्म के दौरान हुई थी | संजय दत्त पहले रिचा शर्म को एक मैग्जीन में देखा था उस समय रिचा शर्मा  1987 में फिल्म 'आग ही आग' की शूटिंग कर रही थीं | उस फिल्म के दौरान ही संजय ने रिचा को प्रपोज किया लेकिन उस समय रिचा ने कोई जबाब नहीं दिया | लेकिन संजय दत्त यही नहीं रुके उन्होंने रिचा को बार बार फोने करते रहे जवाब सुनने के लिए | लेकिन रिचा ने आखिर में हां कर दिया फिर दोनों की सदी 1987 में हुई, एक साल बाद 1988 में उनकी बेटी त्रिशाला हुई | बेटी त

मर्दों के संग चलना है

कविता, मुख्य
चाँद की तरह निकलना है और सूरज जैसे ढलना है। और  बराबर हो तुमको मर्दों  के  संग  चलना  है। जरा-जरा सी बात पे क्यूँ रो पड़ती हो तुम अँधेरे से अब भी क्यूँ  इतना डरती हो तुम काली नजरों से सबकी बचना  पड़ता है तुमको फिर जाने क्यों इतना शृंगार सुघर करती हो तुम घर से बाहर जब निकलो साथ किसी के निकलना है। और  बराबर  हो  तुमको मर्दों के  संग चलना  है। कोख में अपनी  रख जिसको  तुम दुनिया में लाती हो निज औलाद को भी तुम अपना नाम कहाँ दे पाती हो छोड़ के इस घर को तुमको उस घर में जाना पड़ता है, बेटी कभी, कभी  बीवी, फिर तुम माँ बन  जाती हो हो अनुकूल समय के ही तुमको हर रोज बदलना है। और  बराबर हो तुमको मर्दों के  संग  चलना  है। जाने किन नजरों में तुम सम्मान ढूँढती फिरती हो
जीवन ऊर्जा तो एक हीं है:अजय अमिताभ सुमन

जीवन ऊर्जा तो एक हीं है:अजय अमिताभ सुमन

कविता, मुख्य, साहित्य, हिन्दी साहित्य
PC:Pixabay जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,ये तुमपे कैसे खर्च करो। या जीवन में अर्थ भरो या यूँ हीं इसको व्यर्थ करो। या मन में रखो हींन भाव और ईक्क्षित औरों पे प्रभाव, भागो बंगला  गाड़ी  पीछे ,कभी ओहदा कुर्सी के नीचे, जीवन को खाली व्यर्थ करो, जीवन ऊर्जा तो एक हीं है, ये तुमपे कैसे खर्च करो। या पोषित हृदय में संताप, या जीवन ग्रसित वेग ताप, कभी ईर्ष्या,पीड़ा हो जलन, कभी घृणा की धधके अगन, अभिमान, क्रोध अनर्थ  तजो, जीवन ऊर्जा तो एक हीं है, ये तुमपे कैसे खर्च करो। या लिखो गीत कोई कविता,निज हृदय प्रवाहित हो सरिता, कोई चित्र रचो,संगीत रचो, कि कोई नृत्य कोई प्रीत रचो, तुम हीं संबल समर्थ अहो,जीवन ऊर्जा तो एक हीं है, ये तुमपे कैसे खर्च करो। जीवन मे होती रहे आय,हो जीवन का ना ये पर्याय, कि तुममे बसती है सृष्टी, हो सकती ईश्वर की भक्ति, तुम कोई तो
हकीकत-अजय अमिताभ सुमन

हकीकत-अजय अमिताभ सुमन

PC:Pixabay रोज उठकर सबेरे नोट की तलाश में , चलना पड़ता है मीलों पेट की खुराक में.  सच का दामन पकड़ के घर से निकालता है जो, झूठ की परिभाषाओं से गश खा जाता है वो.  बन गयी बाज़ार दुनिया,बिक रहा सामान है, दिख रहा जो जितना ऊँचा उतना बेईमान है.  औरों की बातें है झूठी औरों की बातो में खोट, मिलने पे सड़क पे ना छोड़े पाँच का भी एक नोट.  तो डोलते नियत जगत में डोलता ईमान है, और भी डुलाने को मिल रहे सामान है.  औरतें बन ठन चली बाजार सजाए हुए , जिस्म पे पोशाक तंग है आग दहकाए हुए.  तो तन बदन में आग लेके चल रहा है आदमी, ख्वाहिशों की राख़ में भी जल रहा है आदमी.  खुद की आदतों से अक्सर सच हीं में लाचार है, आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है.  अजय अमिताभ सुमन सर्वाधिकार सुरक्षित