मुख्य
कवि की अभिलाषा:अजय अमिताभ सुमन
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ओ मेरी कविते तू कर परिवर्तित अपनी भाषा,
तू फिर से सजा दे ख्वाब नए प्रकटित कर जन मन व्यथा।
ये देख देश का नर्म पड़े ना गर्म रुधिर,
भेदन करने है लक्ष्य भ्रष्ट हो ना तुणीर।
तू भूल सभी वो बात की प्रेयशी की गालों पे,
रचा करती थी गीत देहयष्टि पे बालों पे।
ओ कविते नहीं है वक्त देख सावन भादों,
आते जाते है मेघ इन्हें आने जाने दो।
कविते प्रेममय वाणी का अब वक्त कहाँ है भारत में?
गीता भूले सारे यहाँ भूले कुरान सब भारत में।
परियों की कहे कहानी कहो समय है क्या?
बडे मुश्किल में हैं राम और रावण जीता।
यह राष्ट्र पीड़ित है अनगिनत भुचालों से,
रमण कर रहे भेड़िये दुखी श्रीगालों से।
बातों से कभी भी पेट देश का भरा नहीं,
वादों और वादों से सिर्फ हुआ है भला कभी?
राज मूषको का उल्लू अब शासक है,
शेर कर रहे न्याय पीड़ित मृग शावक है।
भारत माता पीड़ित अपनों के हाथों से,
चीर र
मैं और ब्रह्मांड-अजय अमिताभ सुमन
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मैं,
मेरा घर,
मेरा छोटा सा घर,
एक छोटे से गाँव में.
और गाँव,
मेरा गाँव,
मेरा छोटा सा गाँव,
एक शहर के पास.
और शहर,
वो छोटा सा शहर,
मेरे इस देश में.
और देश,
मेरा देश,
ऐसे सैकड़ो देश,
धरती पे.
और धरती,
ये धरती,
मेरी प्यारी धरती,
मेरी छोटी सी धरती,
घुमती गोल गोल,
सूरज के चारों ओर,
अन्य ग्रहों के साथ.
और सूरज,
मेरा सूरज,
मेरा प्यारा सूरज,
घुमता गोल गोल,
अपने ग्रहों के साथ,
एक अकाश गंगा के पीछे.
और अकाश गंगा,
मेरी अकाश गंगा,
जहाँ हजारों तारे,
करोड़ो तारे,
जहाँ ब्लैक होल्स,
हजारों ब्लैक होल्स,
करोड़ो ब्लैक होल्स,
अनगिनत ब्लैक होल्स.
जहाँ तारे,
हजारों तारे,
करोड़ो तारे,
बनते,मिटते.
और ऐसी आकाश गंगा,
हजारों आकाश गंगा,
करोड़ो आकाश गंगा,
अनगिनत आकाश गंगा,
जनमती आकाश गंगा,
बिगड़ती आकाश गंगा,
मिटती आकाश ग
मिली जुली सरकार की तरह (अजय अमिताभ सुमन)
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फंसी जीवन की नैया मेरी,बीच मझधार की तरह।
तू दे दे सहारा मुझको,बन पतवार की तरह ।
तेरी पलकों की मैंने जो,छांव पायी है।
मेरी सुखी सी बगिया में,हरियाली छाई है।
तेरा ये हंसना है या कि,रुनझुन रुनझुन।
खनखनाना कोई,वोटों की झंकार की तरह।
तेरे आगोश में ही,रहने की चाहत है।
तेरे मेघ से बालों ने,किया मुझे आहत है।
मेजोरिटी कौम की हो तुम,तो इसमे मेरा क्या दोष।
ये इश्क नही मेरा,पॉलिटिकल हथियार की तरह।
हर पॉँच साल पे नही, हर रोज वापस आऊंगा।
तेरी नजरों के सामने हीं,ये जीवन बिताउंगा।
अगर कहता हूँ कुछ तो,निभाउंगा सच में हीं।
समझो न मेरा वादा,चुनावी प्रचार की तरह।
जबसे तेरे हुस्न की,एक झलक पाई है।
नही और हासिल करने की,ख्वाहिश बाकी है।
अब बस भी करो ये रखना दुरी मुझसे।
जैसे जनता से जनता की सरकार की तरह।
प्रिये कह के तो देख,कुछ भी कर जाउंगा।
ओमपुरी सड़क को,हेमा माफिक बनवाऊंगा।
अब छोड़ भी दो यूँ,च
जय हो ,जय हो नितीश तुम्हारी जय हो-अजय अमिताभ सुमन
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जय हो,जय हो,
नितीश तुम्हारी जय हो।
जय हो एक नवल बिहार की,
सुनियोजित विचार की,
और सशक्त सरकार की,
कि तेरा भाग्य उदय हो,
तेरी जय हो।
जाति पाँति पोषण के साधन कहाँ होते?
धर्मं आदि से पेट नहीं भरा करते।
जाति पाँति की बात करेंगे जो, मुँह की खायेंगें।
काम करेंगे वही यहाँ, टिक पाएंगे।
स्वक्षता और विकास,
संकल्प सही तुम्हारा है।
शिक्षा और सुशासन चहुँ ओर,
तुम्हारा नारा है।
हर गाँव नगर घर और डगर डगर,
हर रात दिन वर्ष और हर पहर।
नितीश तुम्हारा यही सही है एक विचार,
हो उर्जा का समुचित सुनियोजित संचार।
रात घनेरी बीती,
सबेरा आया है,
जन-गण मन में व्याप्त,
नितीश का साया है।
गौतमबुद्ध की धरा,
इस पावन संसार में,
लौट आया सम्मान,
शब्द बिहार में।
हर गली गली में जोश,
उल्लास अब आया है,
मदमस्त बाहुबली थे जो,
मलीन अब काया ह
ये वकील दुनिया में नाम कर जाएगा:(हास्य व्ययंग):अजय अमिताभ सुमन
जो कर न सके कोई वो काम कर जाएगा,
ये वकील दुनिया में नाम कर जाएगा।
फेकेगा दाना,फैलाएगा जाल,
सोचे कि करे कैसे मुर्गे हलाल।
आये समझ में ना शकुनी को जो भी,
चाल शतरंजी तमाम चल जायेगा.
ये वकील दुनिया में नाम कर जायेगा।
चक्कर कटवाएगा धंधे के नाम पे,
सालो लगवाएगा महीनों के काम पे।
ना हो ख़तम केस कि लगाके पेटिशन,
एडजर्नमेंट के सारे इन्तजाम कर जाएगा।
ये वकील दुनिया में नाम कर जाएगा।
एडजर्नमेंट पेटिसन कि मांगेगा फीस,
क्लाएंट का लोन से,टूटे भले ही शीश।
होने पे डिसमिस एडजर्नमेंट पेटिसन के,
अपील के प्रबंध ये तमाम कर जाएगा।
ये वकील दुनिया में नाम कर जाएगा।
ना हो दम केस में , फिर भी लड़वाएगा,
जेब भारी क्लाएंट की खाली करवाएगा।
बिकेगा क्लाएंट का नाम ग्राम धाम तब,
सबकुछ नीलाम ये तमाम कर जाएगा .
ये वकील दुनिया में नाम कर जाएगा।
मच्छड़ के माफिक , खून को चूस ,
बैठ के सिने पे , निकलेगा जूस।
क्लाएंट के सर
सरकारी पालिसी:अजय अमिताभ सुमन
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रिक्शेवाले से लाला पूछा चलोगे क्या फरीदाबाद?
उसने बोला झटाक से उठकर बिल्कुल तैयार हूँ भाई साब.
मैं तैयार हूँ भाई साब कि सामान क्या है तेरे साथ?
तोंद उठाकर लाला बोला आया तो मैं खाली हाथ.
आया तो मैं खाली हाथ की साथ मेरे घरवाली है.
और देख ले पीछे भैया वो हथिनी मेरी साली है.
वो हथिनी मेरी साली है कि क्या लोगे किराया?
देख के तीनों लाला हाथी रिक्शा भी चकराया.
रिक्शावाला बोला पहले आजमा लूँ अपनी ताकत.
दुबला पतला चिरकूट मैं तुम तीनों के तीनों आफत.
तीनों के तीनों आफत पहले बैठो तो इस रिक्शे पर.
जोर लगा के देखूं मैं फिर चल पाता है रिक्शा घर?
चल पाता है रिक्शा घर कि जब उसने जोर लगाया.
टूनटूनी कमर वजनी रिक्शा चर चर चर चर चर्राया.
रिक्शा चर मर चर्राया कि रोड ओमपुरी गाल.
डगमग डगमग रिक्शा डोले हुआ बहुत ही बुरा हाल.
हुआ बहुत ही बुरा हाल
मर्सिडीज बेंज वाला गरीब आदमी:अजय अमिताभ सुमन
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राजेश दिल्ली में एक वकील के पास ड्राईवर की नौकरी करता था. रोज सुबह समय से साहब के पास पहुंचकर उनकी मर्सिडीज बेंज की सफाई करता और साहब जहाँ कहते ,उनको ले जाता. पिछले पाँच दिनों से बीमार था. ठीक होने के बात ड्यूटी ज्वाइन की. फिर साहब से पगार लेने का वक्त आया. साहब ने बताया कि ओवर टाइम मिलाकर उसके 9122 रूपये बनते है . राजेश ने पूछा , साहब मेरे इससे तो ज्यादा पैसे बनते हैं. साहब ने कहा तुम पिछले महीने पाँच दिन बीमार थे. तुम्हारे बदले किसी और को ले जाना पड़ा. उसके पैसे तो तुम्हारे हीं पगार से काटने चाहिए. राजेश के ऊपर पुरे परिवार की जिम्मेवारी थी. मरते क्या ना करता.उसने चुप चाप स्वीकार कर लिया. साहब ने उसे 9100 रूपये दिए. पूछा तुम्हारे पास 78 रूपये खुल्ले है क्या? राजेश ने कहा खुल्ले नहीं थे. मजबूरन उसे 9100 रूपये लेकर लौटने पड़े.
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उसका
भारत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रचा इतिहास, 5वें वनडे में 26 साल में पहली बार अफ्रीका में जीती सीरीज
टीम प्लेइंग
भारत:- विराट कोहली (कप्तान), जसप्रीत बुमराह, रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे, शिखर धवन, श्रेयस अय्यर, महेंद्र सिंह धोनी, हार्दिक पंड्या, युजवेंद्र चहल, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव |
साउथ अफ्रीका:- एडेन मार्करम (कप्तान), हाशिम अमला, एबी डिविलियर्स, जेपी डुमिनी, डेविड मिलर, तबरेज शम्सी, कैगिसो रबाडा, फेहलुकवायो और मोर्ने मोर्केल, लुंगी नगीदी, हेनरिक क्लासेन (विकेटकीपर) |
टीम इंडिया ने अफ्रीका को दिया 275 रनों का लक्ष्य
भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट गंवा कर 274 रन बनाए , रोहित शर्मा ने अपने वनडे करियर का 17वां शतक लगाते हुए 115 रन बनाए |
साउथ अफ्रीका
साउथ अफ्रीका को जीत के लिए भारत ने 275 रनों का टारगेट दिया. जवाब में साउथ अफ्रीका टीम 42.2 ओवर में ही 201 रन बनाकर ऑल आउट हो गई |
अन्ना का चूस लिया गन्ना:व्ययंग:अजय अमिताभ सुमन
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पहली बात तो मैं ये बता दूँ , ना तो मैं केजरीवाल जी का विरोधी हूँ और ना अन्ना जी का समर्थक ।एक बात ये भी बता दूँ की इस लेख का जो शीर्षक है उसका लेखक भी मैं नहीं । इस लेख का लेखक दरअसल एक ऑटो वाला है जिसने हाल ही में ये बात कही थी, मजाकिया अंदाज में।
खैर उसने ये बात "अन्ना का चूस लिया गन्ना" इस परिप्रेक्ष्य में कहा था कि केजरीवालजी ने अपने राजनैतिक कैरियर के लिए अन्नाजी का उपयोग किया , उनका इस्तेमाल किया , फिर उपयोग करके उन्हें फेंक दिया । ये बात मेरे जेहन में भीतर तक घुस गयी । उस ऑटो वाले की बात मुझे बार बार चुभ रही थी।
एक एक करके मुझे वो सारी पुरानी बातें याद आने लगी । वो रामलीला मैदान याद आने लगा जहाँ मेरे जैसे हजारों लोग अन्ना जी के नाम पे पहुंचे थे।भींगते हुए पानी में अन्नाजी का घंटों तक अन्नाजी इन्तेजार किया था। यहाँ तक की मेर

