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अब ‘ब्यूबोनिक प्लेग’ “Bubonic Plague” का खतरा ! चीन में पाए गए दर्जनों मरीज – इसे “काली मौत” के नाम से भी जाना जाता है |

Bubonic Plague - chuha and Flea
Bubonic Plague – chuha and Flea

पूरी दुनिया अभी कोरोना से ही बाहर नहीं निकाल पाई है की इसी बीच चीन से एक और बुरी खबर आ रही है, चीन में ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) नामक एक जानलेवा और खतरनाक बीमारी ने एंट्री मार दी है. ब्यूबोनिक प्लेग कोई नयी बीमारी नहीं है बल्कि ये पहले भी पूरी दुनिया में तहलका मचा चुकी है, जिसके चलते करोड़ों लोगों की जाने चली गई थी. लेकिन दोबारा इस बीमारी ने अपना पैर फैलाने चालू कर दी है. आप को बात दें की पूरी दुनिया इस बीमारी को काली मौत या ब्लैक डेथ के नाम से जानती है. ब्लैक डेथ नाम 1347 में पड़ा जब यूरोप की एक तिहाई आबादी इसके चपेट में आई और को खत्म हो गई. अब तो लोगों ने सवाल भी करना चालू कर दिया है की आखिर चीन से ही बीमारी क्यों फैलती है ?


इस बीमारी को ले कर पूरे चीन में चेतावनी जारी कर दिया गया है, और सरकर के माध्यम से हर अस्पतालों को निर्देश पारित कर दिया गया है. मीडिया सूचना के अनुसार चीन के मंगोलियाई क्षेत्र में प्लेग फैल रहा है जिसे ले कर चेतावनी चारी की गई है. और लोग को सावधान रहने को कहा गया है.


मेडिकल साइंस की माने तो ये बीमारी जंगली चूहों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से होती है जिसका नाम यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम (Yersinia Pestis Bacterium) है, यह बैक्टीरिया इतना खतरनाक है की एक बार शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे खून और फेफड़ों पर हाबी हो जाता है जिसके हमले से हाथों और पैरों के उंगलियां और नाक भी काली पड़ जाती है. ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague)सबसे पहले जंगली चूहों में होते है लेकिन चूहों के मरने के बाद यह बैक्टीरिया Flea (पिस्सू) में प्रवेश कर जाते है उसके बाद जब Flea (पिस्सू) इंसानों को काटता है तो ये बैक्टीरिया इंसानों में प्रवेश कर जाते है.


इस बैक्टीरिया के इंसानों में प्रवेश करने का दूसरा कारण भी है. चूहें के मरने के बाद ये बैक्टीरिया किसी ना किसी पशु-पक्षी में प्रवेश कर जाते है और उनके माध्यम से इंसानों में प्रवेश कर जाते है. ये सबसे पहले मांसाहारी इंसानों में फैलता है जो पशु-पक्षी को खाते है उसके बाद एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलाने लगते है.


आप को बात दें की ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) को गिल्टीवाला प्लेग भी कहते हैं. और इस प्लेग को 7वीं सदी में प्लेग ऑफ जस्टिनियन (Plague Of Justinian) के नाम से भी जाना जाता था. 6वीं से 7वीं सदी में इस प्लेग ने पूरी दुनिया में करीब 3-4 करोड़ लोगों की जान ले चुकी है.


इस प्लेग के सुरुवाती लक्षण में असहनीय दर्द, तेज बुखार और नाड़ी तेज चलने लगती है इसके बाद पूरे शरीर में गिल्टियां निकलने लगती है. केवल गिलतियाँ ही नहीं निकलती बल्कि 10-15 दिन में गिल्टियां पकने लगती है और घाव का रूप ले लेती है जिसका दर्द बर्दस्त करना मुस्किल हो जाता है.


ये प्लेग चीन के केवल बयन्नुर शहर फैलने की आसंका जाहिर की गई है और पूरे शहर का धीरे-धीरे नाकाबंदी भी चालू कर दिया गया है, चीन सरकार अपने कुछ मेडिकल रिसर्च टीम को भी बयन्नुर शहर में लगा रही है ताकि खतरे से निपटा जा सके.


एक रिसर्च के मुताबिक 2010 से 2015 के बीच ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) के पूरे दुनिया में 3000 से ज्यादा ममाले सामने या चुके है और 550 से ज्यादा लोग ने अपनी जान भी गवा दी है.


इस बीमारी ने पूरे दुनिया को कई बार अपने चपेट में ले चुकी है 1970 से 1980 में ब्यूबोनिक प्लेग के चपेट में चीन, रूस, भारत, अफ्रीका, और अमेरिका जैसे देशों थे.


अगर आप इस तरह के महामारी से बचना चाहते है तो मेडिकल साइंस द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार ही सावधानी बरते. भीड़-भाड़ में ना जाएं, अपने आस-पास सफाई रखें, अपने घर के आस-पास कूड़ा-और पनि ना जमा होने दें, घर के पास की नालियों को साफ करते रहें, सोशल डिस्टेंसिनग को बनाए रखें, भीड़-भाड़ जगह से दूर रहें, हो सके तो माँस-मछली खाना बंद कर दें और मास्क पहन कर रहें. सावधानी ही आप के बचाव का रास्ता है.


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