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Author: Mukesh Chakarwarti

एक बालक की पुकार

एक बालक की पुकार

साहित्य, हिन्दी साहित्य
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); नोट - घर पर कोई नहीं है रात का समय है एक बालक अकेले घर पर है और डरा हुवा है , अन्धकार के चलते आकाश के चाँद - सितारों को मना रहा है , उनको फुसिला रहा है अपने मीठी बातों से । आजा तारे -चाँद सितारे , आजा मेरे घर पर । मेरे घर को तू चमकादे , अंधियारा तू दूर भगा दे । अच्छा नहीं लगता अंधियारा , तू हीं लगता है मुझे प्यारा । आजा तारे - चाँद सितारे , आजा मेरे घर पर । तेरे बिना ना पढ़ सकता मैं , तेरे बिना ना रह सकता मैं । कैसे मैं तुझे मनाऊँ , कैसे कर मैं तुझे समझाऊँ । मैं तुमसे बिनती करता हूँ, तुमसे मैं रो कर कहता हूँ । हे आकाश के चाँद -सितारे , सुन ले ईश बालक की बाते , कर दे तू अँधियारा दूर , कर दे तू अँधियारा दूर । Mukesh Chakarwarti  
गर्भवती होने के लिए कब क्या करे, क्या है सही समय

गर्भवती होने के लिए कब क्या करे, क्या है सही समय

प्रेगनेंसी-पेरेंटिंग, महिलाएं
स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार गर्भवती होने के लिए जितना सेक्‍स करना जरुरी है उतना ही ये भी जरुरी है की इस बात की जानकारी होनी चाहिए की सेक्स कब किया जाए | इस पहलू पर ना ध्यान देने से कई बार गर्भधारण करने में भी परेशानी भी आती है | क्या है कारण गर्भधारण न कर पाने के पीछे | वैसे तो गर्भधारण कर पाने के पीछे कई कारण हो सकते है| साथ जी इसके तहत महिला और पुरुष के शारीरिक और मानसिक दोनों कारण हो सकते है | ज्यादा तर तो ज्ञान और जानकारी का अभाव होना जिसके तहत सही समय पर सेक्स ना करना, सेक्स के बातो को ध्यान में ना रखना | (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); लेकिन इन सब के साथ और भी बहुत से कारण हो सकते है | गर्भ धारण करने का प्रयत्न करने से पहले वे दोनों अपना शारीरिक परीक्षण करवा लें क्योंकि इससे गर्भावस्था से संबंधित कई समस्याओं का निदान करने में सहायता मिलती है। जानें कि ग
चम्पारण सत्याग्रह के पहले १०० साल पे आइये जाने सुबह से शाम तक कैसी होती थी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की दिनचर्या

चम्पारण सत्याग्रह के पहले १०० साल पे आइये जाने सुबह से शाम तक कैसी होती थी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की दिनचर्या

देश, मुख्य
चम्पारण में गान्धीजी का निवास एवं दिनचर्या (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push ({}); दिनांक 19.04.1917 को गान्धीजी को लग गया था कि चम्पारण में लम्बे समय तक रहना पड़ेगा तथा सहयोगियों के लिए बड़े एव अलग घर की आवश्यकता पड़ेगी। श्री राम दयाल प्रसाद जो मोतिहारी के साहू घराने के युवक थे । उन्होंने एक अलग मकान की व्यवस्था कर दिया। उसी समय गान्धीजी ने सबोको आदेश दिया कि नये निवास स्थान में चलना है। मकान की सफाई बगैरह होते-होते संध्या हो गई तथा सभी लोगों ने सोचा कि आज रात में नई जगह न जाकर अगले दिन सुबह चले चलेंगे और सभी सहयोगियों ने न जाने का फैसला किया। रात में करीब नौ बजे के बाद गान्धीजी ने जानना चाहा कि नए मकान में कब चलना है तब उन्हें बताया गया कि सब की राय है कि कल सबेरे चलेंगे। सभी सहयोगियों का यह विचार गान्धीजी को पसन्द नहीं आया। उन्होंने सबो से कहा कि ‘‘जब एक बार
उत्तराखंड में भारतीय सीमा में घुसे चीनी सैनिक, दो घंटे बाद वापस लौटे

उत्तराखंड में भारतीय सीमा में घुसे चीनी सैनिक, दो घंटे बाद वापस लौटे

देश, मुख्य
बताया जा रहा है कि चीनी सेना के जवान 500 मीटर तक भारतीय सीमा में घुस आए और दो घंटे के बाद वापस चले गए. जानकारी के अनुसार यह घटना पिछले हफ्ते की है. नई दिल्ली: भारत और चीन की सीमा कई स्थानों पर निर्धारित नहीं है, लेकिन कई जगहों पर सीमा स्पष्ट है. इसके बावजूद चीन की ओर से भारतीय सीमा क्षेत्र का उल्लंघन होता रहा है. अब उत्तराखंड में चीनी सेना के जवानों के भारतीय सीमा में घुस आने की खबर है. बताया जा रहा है कि चीनी सेना के जवान 500 मीटर तक भारतीय सीमा में घुस आए और दो घंटे के बाद वापस चले गए. गृह मंत्रालय के अधिकारी ने भी इस बात को माना है चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुस आए थे. जानकारी के अनुसार यह घटना पिछले हफ्ते की है. हालां‍क‍ि सेना और सरकारी सूत्रों ने उत्तराखंड के बराहोती में चीनी सेना के घुसपैठ की खबर को गलत बताया है. सूत्रों का कहना है कि वहां आमतौर पर दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे के
जीवन के उलझन

जीवन के उलझन

साहित्य
  उलझन एक अजीब है , जब उलझे संसार | प्रेम में उलझन , बनती बात , प्रेम  उलझकर बना ओ प्यार , इतना सुन्दर ये संसार || प्रेम रूपी जब दीप जला तो , खुशियों से खिलता संसार | खुशिया बहुत निराली है , जब  उलझन बनता प्यार ही प्यार || जब उलझन होता झगड़ो का , तब दुनिया बनती खड़हर सा | इश दुनियाँ (परिवार) में दीप न जलता , तो लगता है आया काल | काल रूपी जब दीप जला तो , खुशियाँ बनती है जौजाल || जब खुशियाँ उठती है ऊपर , तो आते है काल का छाँव | इश छाँव में जल जाते है , ऊपर -ऊपर के ही पाँव || तो लगे कबारन(उजागर)  उन मुर्दो(बात)  को , जो खुशिओं से दबे पड़े थे | जब कबरन को मुर्दे लागे, तो लागे संसार की दुरी भागे | छांट - छूँट कर , बाट बूट कर , अलगा हुवा यही संसार |- 2 | एक ही खून के दो जन्मे थे , लेकिन बात नहीं बनते थे | एक लगा कुछ बोलन लागे , दूसरा बोलन जोर से लागे || इशी बीच में हो गई
मच्छर दाता – मलेरिया के बिधाता

मच्छर दाता – मलेरिया के बिधाता

साहित्य, हिन्दी साहित्य
                                                                                                                                                                                       हे रातों के मच्छर दाता,            तू ही मलेरिया का है बिधाता | तू चाहें तो रात बिता दे,       तू चाहें तो रात भर जगा दें | तेरी दया जहाँ जाती है ,       वहां कृपया रहता है तुम्हारा | तेरा घर तो नाला – नाली       नदी, तालाब, और गंदे पानी | तू तो दिन वही बिताता,       रात को मेरे घर में आता | ऊँ ऊँ कर बाते तू करता,       तू तो सबसे है कुछ कहता | तेरी बाते बहुत निराली, ऊ ऊ वाली बाते प्यारी |       तेरी बाते जो ना सुनता उसको तू देता है दण्ड | हे रातों के मच्छर दाता, तू ही मलेरिया का है बिधाता |                                                        - Mukesh Chakarwarti  Follow on twitter
भोजपुरी आंदोलन का नया प्रारूप है ‘पुरुआ’

भोजपुरी आंदोलन का नया प्रारूप है ‘पुरुआ’

मुख्य
भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता के लिए बहुत पहले से आवाज उठती आ रही है। लगभग 50 सालों से अलग-अलग स्तर पे आन्दोलन चल रहे हैं। सरकार का इस मुद्दे परक्या रुख है ये तो अबतक साफ नहीं है लेकिन इन दिनों एक संगठन ने आन्दोलन का अलग ही रूप इख़्तियार किया है। कुछ ही दिनों पहले शुरू हुए इस संगठन का मानना है कि भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता ना मिलने की एक बहुत बड़ी वजह ये है कि लोगों को इस भाषा की गहराई नहीं मालूम लोग भोजपुरी को बस अश्लील और द्विअर्थी गीतों से ही जानते हैं। लोगों की इस सोच को बदलने का बीड़ा उठाया है युवाओं के संगठन "पुरुआ" ने। "पुरुआ कुछ यूवाओं का संगठन है जिनका संकल्प है भोजपुरी भाषा में अच्छे और स्तरीय गीत-संगीत का निर्माण करना। इसके लिए इन्होने देश-विदेश से भोजपुरी भाषियों को जोड़ा है एवं नए कलाकारों को लेकर ही गीत संगीत का निर्माण कार्य कर रहे हैं। (adsbygoogle = window.ads
हिन्दी दिवस  (Hindi Diwas) पर सहवाग ने दी ट्विटर पर बधाई, लेकिन कर बैठे बड़ी चूक | बाद में सुधारा भी…

हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) पर सहवाग ने दी ट्विटर पर बधाई, लेकिन कर बैठे बड़ी चूक | बाद में सुधारा भी…

क्रिकेट, मुख्य
हिन्दी दिवस पर किए गए ट्वीट में वीरेंद्र सहवाग से चूक तो हुई लेकिन उन्होंने इसे एक अन्य ट्वीट में ठीक भी कर लिया...   ये तो सभी आप भी जानते हो की वीरेन्द्र सहवाग (वीरू) जो की भारतीय क्रिकेट के ताबड़ – तोड़, धाकड़ बल्लेबाज रहे वीरू आजकल अपने मजेदार ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट्स के लिए जाने जाते है | (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); 14 सितंबर हिन्दी दिवस के मौके पर सहवाग ( वीरू) ने भी ट्विटर पर सभी फैन्स को हिन्दी दिवस की बधाई दी. लेकिन इस बार वीरेन्द्र सहवाग ने ट्वीट करते वक्त बड़ी चूक कर बैठे | इसमें वह स्पेलिंग मिस्टेक कर गए , वैसे उन्होंने अपने ट्वीट के साथ एक फोटो भी पोस्ट की जिसमें कोई चूक नहीं थी | हिन्दि हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोत है ! जो बात हिंदी में है वो किसी और में नही! 17 Sept. को हिंदी कमेंट्री !#HindiDiwas . pic.twi
एक पीड़ित पक्षी की मार्मिक अपील

एक पीड़ित पक्षी की मार्मिक अपील

लाइफस्टाइल (जीवन शैली), सोशल मीडिया
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