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Author: Anubhav Singh Jadoun

" It doesn't matter how slowly you can go as long as you doesn't stop " Mr. Anubhav Singh, is a speaker on self development, rewarding relationships and spiritual awareness. ( spiritual advisor ) He works with a variety of individuals and organizations around and conducts training through workshops and retreats. He has a unique ability to simplify the understanding with practical examples in everyday life. He is highly regarded for his inspirational and motivational style. Please Like & Subscribe this channel for our upcoming Videos…
संघर्ष मुखर्जी नगर

संघर्ष मुखर्जी नगर

करियर
" मुखर्जी नगर " सरकारी नौकरी की प्यास मे पानी की उस बूँद जैसा जिससे किसी प्यासे की प्यास बुझ जाती हो, यही है मुखर्जी नगर | कहा जाता है हमारे देश के हर कोने से यहां बच्चे आते है सरकारी नौकरी की चाहत और अपने सपनो को नयी दिशा और पूरा करसके इस ज़िद्द से, आइये आपको थोड़ा इनकी स्थति से अवगत कराता हु.... दोस्तों तयारी के लिए आने वाले लाखों छात्र हैं जिनमे एक तो जो छोटी परीक्षाओ मे बस पास होकर सेव लाइफ सेव जॉब करने के सपने लिए  बैठे हैं और दूसरे वो जो बड़ी भयंकर बीमारी से झूझ रहे हैं जिस बीमारी का नाम आई ए एस   दोस्तों ये वो बीमारी है जो आज मुखर्जी नगर के हर कोने मैं रहने वाले बच्चे के दिल मैं बस चुकी है कुछ के लिए ये नशा जैसी हो गयी है यहां रात कब होती है और दिन कब कुछ पता नहीं चलता, यहां चाय की चर्चा यहां बरसो की परंपरा बनी बैठी है जहां वो एक दूसरे से कुछ और बात करने के वजह बात करते
असंभव कुछ नहीं

असंभव कुछ नहीं

कहानी, जीवन वृत्त, मुख्य, व्यक्ति चित्र
हमारा जीवन बहुत कठिन है या में कुछ नहीं कर सकता ये शब्द आपने अकसर अपने आस पास के लोगो से सुना होगा और जब हमारे जीवन में एकसाथ बहुत सी मुश्किल हो तब, हम मुश्किलों का सामना करने की वजह उससे कही दूर भागने की सोचते हैं पर वास्तव में क्या ऐसा हो पाता है नहीं बल्कि हम उसकी चिंता में अपना आत्मविश्वास भी खो बैठते है और बिना कुछ किये ही हार मान लेते हैं जबकि वास्तव में हमने उसके लिए कोई प्रयास ही किया ही नहीं होता | आपको एक कहानी सुनाता हु ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जो उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर की निवासी है और अपने दिल में अपने सपनो को जिन्दा रखकर उन्हें पूरा करने की कोशिश कर रही थी दोस्तों यह बात उन दिनों की है जब यह लखनऊ से दिल्ली ट्रैन से आ रही थी तब ट्रैन में मौका पाकर बरेली के पास बदमाशों ने इनसे लूटपाट करने की कोशिश की तब इन्होने उसका विरोध किया तो उन बदमाशों ने इन्हे ट्रैन से बाहर
माँ वक्त वो ना रहा….

माँ वक्त वो ना रहा….

कविता, चिट्ठी पतरी, मुख्य, सोशल मीडिया, हिन्दी साहित्य
माँ वो वक्त वो ना रहा... ज़ब बचपन माँ तुम्हारे आंचल की छाँव में गुजरता था... ना कोई चिंता होती तब ना कोई फ़िक्र का पहरा रहता  था __ जब रोती कभी आँखें तो माँ चुप कराया करती थी.... अपने प्यार के उस आँचल में मुझे कही छुपाया करती थी.... जब रोज पापा के डर से सरारत कम हो जाया करती थी... किसी का डांटना चिल्लाना भी तब उतना नहीं अखरता था... आज की इस दुनिया मे सब उल्टा सा लगता है__ ना वो बचपन का प्यार अब कही भी दिखता है__ तब मतलब, स्वार्थ, पैसो की दुनिया भी नहीं होती थी__ जलन,  ईर्ष्या, द्वेष की ज्वाला भी ना होती थी __ आज तो हर पग-पग पर पैरों मैं जंजीरें हैँ__ ठुकराते हैँ सब यहां सब खूब ही मुझे रुलाते हैं__ झूठें किस्सों के किरदार भी मुझको कभी बनाते हैं___ माँ तब मे टूट जाता हु सबसे रूठ जाता हुँ __ तुझे याद करके माँ मैं अक्सर रो भी जाता हुँ __